चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने शहरी विकास और निर्माण प्रक्रियाओं को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा जारी नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में 1965 के नियमों में संशोधन प्रस्तावित किया गया है। इस बदलाव के तहत अब सेल्फ-सर्टिफिकेशन (स्व-प्रमाणीकरण) आधारित परमिशन सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे आवेदकों को ऑनलाइन ही मंजूरी मिल सकेगी।
विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव Anurag Rastogi द्वारा जारी प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई आवेदक निर्धारित शर्तों को पूरा करता है और अपने दस्तावेज स्वयं प्रमाणित करता है, तो उसे ऑनलाइन माध्यम से स्वतः अनुमति मिल जाएगी। इससे लंबे समय तक फाइलों के अटकने की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।
⚠️ गलत जानकारी देने पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ सख्त नियम भी लागू किए हैं। यदि कोई आवेदक गलत जानकारी देता है या तथ्यों को छुपाता है, तो उसकी मंजूरी तुरंत रद्द कर दी जाएगी। इससे पारदर्शिता के साथ जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी।
📌 नए नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव
नियमों में दो नई परिभाषाएं जोड़ी गई हैं:
- कनफॉर्मिंग यूज: भूमि या भवन का उपयोग उसी प्रकार होना चाहिए जैसा विकास योजना में तय है।
- कनफॉर्मिंग जोन: वह क्षेत्र जहां तय उपयोग के अनुसार गतिविधियों की अनुमति होगी।
इन बदलावों से जमीन के उपयोग को लेकर भ्रम कम होगा और अनियमित विकास पर नियंत्रण आसान बनेगा।
⚙️ पुरानी प्रक्रिया से राहत
सेल्फ-सर्टिफिकेशन के तहत आने वाले मामलों में नियम 26B, 26C और 26D लागू नहीं होंगे, जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी और प्रक्रिया तेज बनेगी। अब लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे।
📊 क्या होगा फायदा?
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा
- बिल्डर्स और आम लोगों को राहत
- परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी
- सरकारी बोझ में कमी
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस सिस्टम की सफलता ईमानदार सेल्फ-सर्टिफिकेशन और मजबूत निगरानी तंत्र पर निर्भर करेगी।

