हिसार विवाद प्रकरण को लेकर हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में पुलिस की मंशा संदिग्ध है और निष्पक्ष जांच की जरूरत है।
दुष्यंत चौटाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मांग की कि गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर मामले की जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने हिसार के एसपी के तत्काल तबादले की मांग भी रखी। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
उन्होंने कहा कि एसपी कार्यालय द्वारा जारी प्रेस नोट में कई तथ्य गलत हैं, जिन्हें सीसीटीवी फुटेज से साफ देखा जा सकता है। उनके अनुसार, सीआईए इंस्पेक्टर पवन ऑफ ड्यूटी होने के बावजूद उनके काफिले में शामिल हुए और हथियार भी दिखाया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई विवाद था तो पुलिस को थाने में बातचीत करनी चाहिए थी।
दुष्यंत चौटाला ने यह भी आरोप लगाया कि अक्टूबर 2024 से एक फर्जी नंबर की बोलेरो गाड़ी से सादी वर्दी में उनका पीछा किया जा रहा था, जो कानून के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जेजेपी और इनसो द्वारा छात्र मुद्दे उठाने पर पुलिस के जरिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश की जा रही है।
इस मामले में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में प्रदर्शन के दौरान हुए नुकसान को लेकर दिग्विजय चौटाला सहित आठ नेताओं पर केस दर्ज किया गया है। दुष्यंत ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रात में छापेमारी कर कार्यकर्ताओं को परेशान किया और महिला जिला अध्यक्ष के घर बिना महिला पुलिसकर्मियों के प्रवेश कर उनके पति को गिरफ्तार किया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि एसपी कार्यालय जाते समय उनके काफिले को अज्ञात वाहनों ने रोका और धमकाया, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों की संलिप्तता भी बताई गई। दुष्यंत के अनुसार, पुलिस जांच करने के बजाय आरोपियों को बचाने में लगी है और सीसीटीवी फुटेज तक हटाई जा रही है।
वहीं, दिग्विजय चौटाला ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि आंदोलन का नेतृत्व करने के बावजूद उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, जबकि कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इनसो की गतिविधियों को दबाने की कोशिश कर रही है।

