हरियाणा के सिरसा जिले के गांव पन्नीवाला रुलदु स्थित ई-20 ग्रीन फ्यूल्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कृषि उपयोग की सब्सिडी वाली यूरिया के कथित औद्योगिक इस्तेमाल का मामला सामने आया है। कृषि विभाग की जांच के बाद सदर थाना पुलिस ने ई-20 ग्रीन फ्यूल्स और दिल्ली की सप्लायर फर्म शुभम इंटरनेशनल (बुराड़ी) के खिलाफ धोखाधड़ी, आवश्यक वस्तु अधिनियम और फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर के तहत एफआईआर दर्ज की है।
जांच के दौरान फैक्ट्री परिसर से कुल 763 यूरिया के बैग बरामद किए गए। इनमें छह बैग इंडियन पोटाश लिमिटेड के कृषि ग्रेड यूरिया के मिले, जबकि 757 बैग ऐसे पाए गए जिन पर बैच नंबर, निर्माण तिथि और निर्माता कंपनी जैसी अनिवार्य जानकारी दर्ज नहीं थी। कृषि विभाग ने संदिग्ध खाद के 10 सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं।
अधिकारियों के अनुसार छापेमारी के दौरान यूरिया के बैगों से नीम कोटिंग की महक आने पर शक गहरा गया। कृषि उपयोग वाली यूरिया में सरकार द्वारा नीम कोटिंग की जाती है, जबकि औद्योगिक उपयोग के लिए केवल टेक्निकल ग्रेड यूरिया का इस्तेमाल किया जा सकता है। जांच में यह भी सामने आया कि खरीद ऑर्डर में माल को ‘ऑर्गेनिक कम्पोस्ट’ दर्शाया गया, जबकि सप्लायर के बिलों में उसे ‘टेक्निकल ग्रेड यूरिया’ बताया गया।
यह कार्रवाई भारतीय किसान एकता के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख की शिकायत के बाद गठित कृषि विभाग की टीम ने की। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, ई-20 ग्रीन फ्यूल्स के सीईओ हैरी ग्रोवर ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कंपनी पूरी पारदर्शिता के साथ काम करती है और इस मामले की जांच में सहयोग करेगी।

