चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से ‘इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पॉलिसी-2015’ में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini की अध्यक्षता में 24 मार्च को हुई कैबिनेट बैठक के फैसले के बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने इन बदलावों को लागू करने के लिए आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। इस कदम से राज्य में उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
🏭 शहरी और ट्रांसपोर्ट जोन में उद्योगों को बढ़ावा
नई नीति के तहत अब औद्योगिक जोन के अलावा ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में भी इंडस्ट्रियल कॉलोनियां स्थापित करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, संतुलन बनाए रखने के लिए यह सीमा कुल क्षेत्रफल के अधिकतम 25 प्रतिशत तक ही तय की गई है। इससे लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी से जुड़े उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा और शहरी क्षेत्रों के आसपास औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
🌾 एग्रीकल्चर जोन के लिए नए नियम
सरकार ने कृषि क्षेत्रों में औद्योगिक लाइसेंस देने के नियमों को भी स्पष्ट और पारदर्शी बनाया है। यदि कोई उद्योग शहरी सीमा से 500 मीटर बाहर कृषि क्षेत्र में स्थापित किया जाता है, तो वहां सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का खर्च निवेशक या डेवलपर को खुद उठाना होगा। इसका उद्देश्य सरकारी वित्तीय बोझ कम करना और निजी भागीदारी को बढ़ावा देना है।
💰 EDC में निवेशकों को राहत
सरकार ने निवेशकों को राहत देते हुए एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (EDC) से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। यदि कृषि क्षेत्र में स्थापित कोई औद्योगिक परियोजना बाद में शहरी क्षेत्र में शामिल हो जाती है, तो उसके पहले से निर्मित हिस्से पर EDC नहीं लिया जाएगा। हालांकि, बाकी बचे या खाली हिस्से पर मौजूदा नियमों के अनुसार शुल्क देना होगा।
📈 रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इन सुधारों से राज्य में निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने से हरियाणा की पहचान एक मजबूत ‘इंडस्ट्रियल हब’ के रूप में और भी मजबूत होगी।

