May 12, 2026
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हरियाणा की सैनिटरी नैपकिन योजना पर सवाल, स्कूलों में खाली बॉक्स – कागजों में चल रही स्कीम

चंडीगढ़: हरियाणा में छात्राओं की स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वच्छता के लिए शुरू की गई सैनिटरी नैपकिन योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। सरकारी रिकॉर्ड में जहां यह योजना सुचारू रूप से चलती दिखाई जा रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में छात्राओं को नियमित रूप से सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। कई जगहों पर सप्लाई पूरी तरह बंद है, जबकि कुछ स्कूलों में बेहद सीमित मात्रा में ही नैपकिन दिए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में छात्राओं को अपने स्तर पर व्यवस्था करनी पड़ रही है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है।


⚠️ कॉन्ट्रैक्ट हुआ, लेकिन सप्लाई नदारद

जानकारी के मुताबिक, शिक्षा विभाग ने इस योजना के तहत सैनिटरी नैपकिन सप्लाई के लिए दो निजी कंपनियों के साथ अनुबंध किया हुआ है। इनमें से एक कंपनी किसी तरह सप्लाई कर रही है, लेकिन वह भी मांग के अनुसार नहीं है। दूसरी कंपनी की स्थिति और भी खराब बताई जा रही है, जहां सप्लाई नाममात्र की हो रही है।

यह स्थिति टेंडर शर्तों के उल्लंघन की ओर साफ इशारा करती है और विभागीय निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कंपनियां अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर पा रही हैं, तो उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।


👩‍🎓 छात्राओं की सेहत पर असर

इस योजना की खामियों का सीधा असर हजारों छात्राओं की स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी जरूरतों पर पड़ रहा है। स्कूलों में पर्याप्त सुविधा न मिलने के कारण उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।


🔍 जवाबदेही किसकी?

यह मामला अब केवल सप्लाई की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी तंत्र की कमजोरी को भी उजागर करता है। अब देखना यह है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और छात्राओं को यह जरूरी सुविधा कब तक सुनिश्चित की जाती है।