चंडीगढ़: चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) से जुड़े बहुचर्चित ₹116 करोड़ के फंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में पांच बैंक अधिकारियों, एक स्मार्ट सिटी अधिकारी और एक निजी व्यक्ति समेत कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के लिए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर 11 फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (FDR) तैयार की गईं, जिनकी कुल राशि ₹116.84 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। आरोप है कि इन फर्जी एफडीआर के माध्यम से सरकारी धन को कथित तौर पर शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।
मामले की शुरुआत चंडीगढ़ नगर निगम की शिकायत के बाद हुई थी। प्रारंभिक जांच चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही थी, लेकिन मामले की गंभीरता और कई राज्यों तक फैले वित्तीय लेन-देन को देखते हुए जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई।
जांच के दौरान एजेंसी को ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे बैंकिंग सिस्टम और मोबाइल एक्सेस का उपयोग कर संदिग्ध लेन-देन किए जाने की आशंका जताई गई है। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
इस घोटाले में चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के साथ-साथ क्रेस्ट (CREST) से जुड़े वित्तीय लेन-देन भी जांच के दायरे में हैं। इससे पहले हरियाणा पुलिस आईडीएफसी बैंक के पूर्व प्रबंधक रिभव ऋषि को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसके पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए थे।
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आने पर पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती हैं। यह मामला हाल के वर्षों में सरकारी फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़े सबसे बड़े मामलों में से एक माना जा रहा है।

