हरियाणा के चर्चित IDFC First Bank फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। मामले में पंचकूला नगर निगम के पूर्व आयुक्त और आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह तथा विकास एवं पंचायत विभाग के पूर्व अधीक्षक प्रिंस शर्मा को पंचकूला कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह ने गिरफ्तारी से पहले मामले के कथित मास्टरमाइंड के साथ हुई मोबाइल चैट को डिलीट कर दिया था। जांच एजेंसी का कहना है कि यह चैट मामले से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों का हिस्सा हो सकती थी और इसकी जांच की जा रही है।
CBI के अनुसार यह मामला अभी भी जांच के निर्णायक चरण में है और कई महत्वपूर्ण कड़ियों को जोड़ना बाकी है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो में दर्ज एफआईआर को राज्य और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद सीबीआई ने अपने हाथ में लिया था। फिलहाल भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत जांच जारी है।
जांच एजेंसी ने बताया कि 21 मई को 13 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसके बाद 12 जून को दाखिल पूरक चार्जशीट में विक्रम वाधवा और राजन सिंह को भी आरोपी बनाया गया। सीबीआई का कहना है कि बैंकिंग नेटवर्क, विभिन्न विभागों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है।
सीबीआई के अनुसार राम कुमार सिंह की भूमिका उस समय से जुड़ी है जब वह नगर निगम पंचकूला और नगर परिषद कालका में आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। वहीं प्रिंस शर्मा की भूमिका विकास एवं पंचायत विभाग में उनकी तैनाती के दौरान लिए गए फैसलों और प्रक्रियाओं से संबंधित बताई जा रही है। दोनों आरोपियों को 18 जून को गिरफ्तार किया गया था और बाद में पुलिस रिमांड के दौरान उनसे विस्तृत पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी ने IDFC First Bank की सेक्टर-32 शाखा में खोले गए खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), बैंक कोटेशन, पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर प्राप्त एसएमएस, बैंक स्टेटमेंट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच की। एजेंसी ने आरोपियों से इन वित्तीय लेन-देन और उनसे जुड़े दस्तावेजों के बारे में कई सवाल पूछे।
CBI ने अदालत को यह भी बताया कि डिजिटल ट्रेल के आधार पर धन के प्रवाह की पड़ताल की जा रही है। जांच में यह जानने की कोशिश की जा रही है कि कथित रूप से गबन की गई राशि किन-किन लोगों और संस्थाओं तक पहुंची। एजेंसी शेल कंपनियों के जरिए धन के ट्रांसफर और बाद में सरकारी खातों में धनराशि लौटाए जाने के पैटर्न की भी जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान एजेंसी ने यह सवाल भी उठाया कि यदि आरोपी स्वयं को निर्दोष मानते हैं तो मोबाइल से चैट और अन्य संदेश क्यों हटाए गए। सीबीआई यह भी जांच कर रही है कि कथित धोखाधड़ी से किसे लाभ हुआ, किन लोगों ने सहयोग किया और पूरे नेटवर्क में बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों तथा निजी व्यक्तियों की क्या भूमिका रही।
CBI का कहना है कि मामले में डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड, शेल कंपनियों और संदिग्ध लेन-देन की गहन जांच जारी है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा जांच के आधार पर आगे अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

