हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने कहा है कि सूचना के अधिकार कानून के तहत एक ही मुद्दे पर बार-बार आवेदन और शिकायतें करना असीमित अधिकार नहीं माना जा सकता। आयोग ने RTI प्रक्रिया में अधिकारियों और आवेदकों की जिम्मेदारियों को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है।
आयोग के अनुसार यदि RTI आवेदन को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया जाता है तो संबंधित लोक सूचना अधिकारी अपनी वैधानिक जिम्मेदारी पूरी नहीं करते। हालिया मामले में आयोग ने आवेदन पर समय पर कार्रवाई और एक ही विषय को बार-बार उठाने के पहलुओं को देखा।
मामला हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से जुड़ी जानकारी का था। आवेदक ने आरोप लगाया था कि उसे पूरी जानकारी नहीं मिली। पहली अपील के बाद मामला आयोग के सामने आया और सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से बाद में जानकारी उपलब्ध कराने की बात सामने आई।
आयोग ने स्पष्ट किया कि RTI आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी को कानून के अनुसार समय पर कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, एक ही विषय पर लगातार नए आवेदन या शिकायतें दायर करने के संबंध में भी RTI कानून की प्रक्रिया और सीमाएं लागू रहती हैं।
फैसले से यह स्पष्ट होता है कि RTI व्यवस्था में सूचना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी और आवेदन प्रक्रिया के उचित इस्तेमाल, दोनों पर ध्यान दिया गया है। आयोग ने जवाबदेही के साथ-साथ अनावश्यक दोहराव से बचने के पहलू को भी रेखांकित किया है।

