June 25, 2026
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हरियाणा में शुरू हुआ ‘वोटर वॉर’, SIR पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने, हर बूथ पर होगी सियासी चौकसी

हरियाणा की राजनीति में अब एक नई और बेहद अहम लड़ाई शुरू हो चुकी है। यह लड़ाई मंचों और रैलियों की नहीं, बल्कि “हर वोट” और “हर वोटर” तक पहुंच बनाने की है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू की जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया ने प्रदेश की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की इस कवायद को राजनीतिक दल आने वाले चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं। यही वजह है कि सत्ता पक्ष भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ने इसे लेकर हाई अलर्ट मोड में तैयारियां शुरू कर दी हैं।

🟠 भाजपा की ‘मेगा स्ट्रैटेजी मीटिंग’

सत्तारूढ़ भाजपा ने 25 मई को पंचकूला स्थित प्रदेश मुख्यालय ‘पंचकमल’ में SIR को लेकर बड़ी रणनीतिक बैठक बुलाई है। बैठक में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा मामलों के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली सहित सांसद, मंत्री, विधायक, जिला प्रभारी और संगठन के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

भाजपा का फोकस बूथ स्तर तक नेटवर्क को मजबूत करने पर है, ताकि नए मतदाताओं को जोड़ने और समर्थक वोटरों के नाम सुरक्षित रखने में कोई कमी न रहे। पार्टी इसे चुनावी “माइक्रो मैनेजमेंट” का सबसे अहम चरण मान रही है।

🔵 कांग्रेस भी पूरी तरह सतर्क

भाजपा की सक्रियता के बीच कांग्रेस भी पीछे नहीं रहना चाहती। प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में 26 और 27 मई को दो अहम बैठकें बुलाई गई हैं। पहले दिन SIR समिति की बैठक होगी, जबकि दूसरे दिन बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) के साथ विस्तृत रणनीति बनाई जाएगी।

बैठकों में पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। कांग्रेस की कोशिश है कि किसी भी समर्थक मतदाता का नाम सूची से न कटे और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत बना रहे।

📋 क्या है SIR और क्यों बढ़ी अहमियत?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) निर्वाचन आयोग का विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट और शुद्ध बनाना है। इसके तहत:

  • नए वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं
  • मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं
  • डुप्लीकेट वोट समाप्त किए जाते हैं
  • पते और अन्य विवरणों का सत्यापन होता है
  • बीएलओ घर-घर जाकर जांच करते हैं

राजनीतिक दलों के लिए यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है, क्योंकि कई सीटों पर जीत-हार कुछ सौ वोटों से तय होती है।

📅 हरियाणा में SIR का कार्यक्रम

  • 5 जून से 14 जून: तैयारी, प्रशिक्षण और प्रिंटिंग कार्य
  • 15 जून से 14 जुलाई: बीएलओ की घर-घर विजिट
  • 21 जुलाई: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन
  • 21 जुलाई से 20 अगस्त: दावे और आपत्तियां
  • 18 सितंबर: दावों और आपत्तियों का निपटारा
  • 22 सितंबर: अंतिम वोटर लिस्ट जारी

⚔️ हर बूथ बनेगा राजनीतिक रणक्षेत्र

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR का सबसे बड़ा फायदा उसी दल को मिलेगा जिसकी बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत होगी। भाजपा सत्ता में होने के कारण संगठनात्मक रूप से अधिक सक्रिय नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस इसे अपने पारंपरिक वोट बैंक को सुरक्षित रखने का बड़ा मौका मान रही है।

अब हरियाणा की राजनीति नारों और रैलियों से आगे बढ़कर “डेटा, वोटर और बूथ मैनेजमेंट” के दौर में प्रवेश कर चुकी है। आने वाले चुनावों की असली बुनियाद अब बूथ स्तर पर रखी जाएगी।