हरियाणा के रोहतक जिले में बाल मजदूरी के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान पिछले 15 महीनों में 194 नाबालिगों को काम से छुड़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। द ट्रिब्यून की 19 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार संबंधित विभागों और टीमों ने विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए बच्चों को श्रम से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की।
रेस्क्यू किए गए बच्चों में अलग-अलग उम्र के नाबालिग शामिल थे। अभियान का उद्देश्य ऐसे बच्चों को काम से हटाकर उनकी शिक्षा और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाना है। अधिकारियों की कार्रवाई के साथ यह भी जांच की जाती है कि बच्चों को किन परिस्थितियों में काम पर लगाया गया था।
बाल मजदूरी के मामलों में केवल बच्चों को काम से छुड़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि उनके परिवार की स्थिति, शिक्षा और पुनर्वास की जरूरतों को भी ध्यान में रखना पड़ता है। इसलिए संबंधित विभाग बच्चों को आवश्यक सहायता से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाते हैं।
रोहतक में सामने आया आंकड़ा बाल संरक्षण व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। नियमित निरीक्षण, शिकायतों पर कार्रवाई और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाकर बाल मजदूरी की घटनाओं को रोकने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन और सामाजिक संगठनों के लिए आगे की चुनौती यह रहेगी कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को दोबारा श्रम में जाने से रोका जाए और उन्हें शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इस दिशा में निरंतर निगरानी और परिवारों के साथ समन्वय जरूरी रहेगा।