हरियाणा सरकार ने जमीन के इंतकाल (mutation) मामलों के निपटारे को समयबद्ध बनाने के लिए अधिकारियों के लिए सख्त समयसीमा तय की है। नए निर्देशों के अनुसार पटवारियों को इंतकाल के मामले पांच दिन के भीतर निपटाने होंगे।
राजस्व अधिकारियों के लिए भी अलग-अलग समयसीमा तय की गई है। कानूनगो और सर्किल रेवेन्यू ऑफिसर (CRO) को अपने स्तर पर मामलों के निपटारे के लिए तीन-तीन दिन की समयसीमा दी गई है। सरकार का उद्देश्य लंबित मामलों को कम करना और प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाना है।
यह फैसला वित्तीय आयुक्त राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग डॉ. सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम, इंतकाल और जमाबंदी के प्रारूप, डिजिटल क्रॉप सर्वे तथा नागरिक संचार सेवाओं की समीक्षा की गई।
सरकार की योजना के तहत निर्धारित समयसीमाओं को मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में शामिल किया जाएगा। इससे राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
समयसीमा लागू होने से जमीन से जुड़े इंतकाल मामलों में अनावश्यक देरी कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही अधिकारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होगी, क्योंकि निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं होने पर लंबित मामलों की निगरानी करना आसान होगा।

