अगले कुछ दिनों के लिए हरियाणा देश के संसदीय संवाद का अहम केंद्र बनने जा रहा है। 8 से 10 जून तक आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (CPA) इंडिया रीजन के नॉर्थ जोन-2 सम्मेलन से पहले तैयारियों की अंतिम समीक्षा की गई।
इस सिलसिले में विभिन्न राज्यों के विधान मंडलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई। यह सम्मेलन केवल औपचारिक आयोजन नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्यों के बीच संसदीय अनुभव साझा करने, बेहतर समन्वय और लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रतिनिधियों के आगमन, ठहरने, स्थानीय आवागमन, प्रोटोकॉल, सुरक्षा और कार्यक्रम स्थलों पर की जा रही व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया कि विभिन्न राज्यों से आने वाले प्रतिनिधिमंडलों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
बैठक में हरियाणा विधानसभा के सचिव राजीव प्रसाद और विधानसभा अध्यक्ष के सलाहकार राम नारायण यादव शामिल हुए। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण का संदेश भी सभी विधान मंडलों तक पहुंचाया गया। संदेश में कहा गया कि यदि किसी पीठासीन अधिकारी की कोई विशेष आवश्यकता या सुझाव हो तो उसकी जानकारी समय रहते विधानसभा सचिवालय तक पहुंचाई जाए, ताकि सम्मेलन शुरू होने से पहले उसे शामिल किया जा सके।
इसके साथ ही सम्मेलन में बोलने वाले वक्ताओं के नाम भी संबंधित विधान मंडलों से मांगे गए हैं ताकि कार्यक्रम और सत्रों की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा सके।
बैठक में लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार और राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी की मौजूदगी ने आयोजन की अहमियत को और बढ़ा दिया। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के वरिष्ठ संसदीय अधिकारी भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बने।
हरियाणा विधानसभा सचिवालय के अनुसार सम्मेलन की सभी तैयारियां तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रही हैं। आयोजन का उद्देश्य केवल प्रतिनिधियों की मेजबानी करना नहीं, बल्कि ऐसा मंच तैयार करना भी है जहां अलग-अलग राज्यों के जनप्रतिनिधि संसदीय कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक संवाद पर अपने अनुभव साझा कर सकें।
अब सम्मेलन शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं और हरियाणा की कोशिश है कि यह आयोजन व्यवस्थाओं, समन्वय और सहभागिता के लिहाज से प्रभावी और यादगार साबित हो।

