June 26, 2026
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मोहाली एयरपोर्ट के नए रूट पर क्यों छिड़ा विवाद? पूरा खर्च अकेले क्यों उठा रहा हरियाणा

चंडीगढ़: शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मोहाली की नई कनेक्टिविटी सड़क को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच बड़ा विवाद सामने आया है। एयरपोर्ट में दोनों राज्यों की बराबर 24.5-24.5 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के बावजूद नई सड़क परियोजना का पूरा खर्च हरियाणा सरकार अकेले उठाने को तैयार हो गई है, जबकि पंजाब ने आर्थिक तंगी का हवाला देकर खुद को इससे अलग कर लिया है।

एयरपोर्ट में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि पंजाब और हरियाणा दोनों इसके बराबर भागीदार हैं। इसके बावजूद एयरपोर्ट तक आसान पहुंच के लिए बनने वाली नई सड़क परियोजना में केवल हरियाणा सक्रिय नजर आ रहा है।

पंजाब सरकार का कहना है कि उसके राज्य के लोगों को पहले से ही मोहाली मार्ग के जरिए एयरपोर्ट तक पर्याप्त कनेक्टिविटी मिल रही है, इसलिए नए रूट से मुख्य लाभ पंचकूला, पूर्वी चंडीगढ़ और हरियाणा क्षेत्र के लोगों को होगा। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने स्पष्ट कहा कि पंजाब इस समय भारी आर्थिक दबाव से गुजर रहा है और वह इस परियोजना में आर्थिक भागीदारी करने की स्थिति में नहीं है।

हालांकि आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार नया रूट पंजाब के कई इलाकों को भी फायदा पहुंचाएगा। जीरकपुर से एयरपोर्ट की दूरी 13.7 किलोमीटर से घटकर 9.6 किलोमीटर रह जाएगी, जबकि मोहाली और आईटी पार्क क्षेत्र के लोगों को भी कम दूरी और कम ट्रैफिक का लाभ मिलेगा।

हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने बैठक में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह सड़क केवल हरियाणा ही नहीं बल्कि पंजाब के निवासियों के लिए भी फायदेमंद होगी। इसके बावजूद पंजाब ने आर्थिक योगदान देने से इनकार कर दिया।

सूत्रों के अनुसार 2019 में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में हुई उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में लागत साझा करने का फॉर्मूला भी सुझाया गया था, लेकिन उस पर सहमति नहीं बन सकी।

अब हरियाणा सरकार अकेले इस परियोजना को आगे बढ़ा रही है। इसके तहत रक्षा मंत्रालय की 38 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा और सड़क निर्माण का पूरा खर्च हरियाणा उठाएगा। इस नई सड़क में एयरपोर्ट नेविगेशन सिस्टम के पास 450 मीटर लंबा अंडरपास भी बनाया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचकूला और पूर्वी चंडीगढ़ के लोगों के लिए यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि 2015 में पुराने घरेलू टर्मिनल के बंद होने के बाद उन्हें एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए लंबा और ट्रैफिक भरा रास्ता इस्तेमाल करना पड़ता है।

इस पूरे मामले में चंडीगढ़ प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सड़क का अलाइनमेंट चंडीगढ़ क्षेत्र से होकर गुजरता है और वहां के निवासियों को भी इसका लाभ मिलेगा, लेकिन यूटी प्रशासन ने अब तक किसी वित्तीय योगदान की घोषणा नहीं की है।